कूचा-ए-यार में जाता तो नज़ारा करता क़ैस आवारा है जंगल में ये वहशत कैसी

“Had he gone to the beloved's street, he would have beheld a wondrous sight; Qais wanders wild in the desert—what strange madness is this plight?”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

अगर क़ैस महबूब की गली में जाता तो उसका दीदार कर लेता; वह जंगल में भटक रहा है, यह कैसी दीवानगी है?

विस्तार

इस शेर में शायर मजनूँ (क़ैस) की मशहूर दीवानगी पर एक बड़ा ही दिलकश सवाल उठाता है। वह कहता है कि अगर क़ैस वीराने और जंगलों में ख़ाक छानने के बजाय महबूब की गली का रुख़ करता, तो उसे अपने यार का खूबसूरत दीदार नसीब होता। शायर बड़े प्यार से यह समझाना चाहता है कि इश्क़ में ख़ुद को बेमक़सद दर्द और तन्हाई में झोंकने से कहीं बेहतर है कि इंसान अपने महबूब के साए और क़ुर्बत की तलाश करे।

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