Sukhan AI
ખાનપાન વિષયાદિક ભોગ
તત્વદર્શીને સર્વે રોગ;

Food, drink, and all worldly pleasures, To the truth-seer, are naught but diseases.

अखा भगत
अर्थ

तत्वदर्शी व्यक्ति के लिए, खान-पान और अन्य सभी सांसारिक भोग केवल रोग के समान हैं।

विस्तार

यह दोहा हमें समझाता है कि जो व्यक्ति सत्य को जानने या अध्यात्मिक गहराई में उतरने का प्रयास करता है, उसके लिए खाने-पीने और अन्य सांसारिक सुख-भोग 'रोग' के समान हो सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि ये चीज़ें बुरी हैं, बल्कि यह है कि ये आसानी से मन को भटका सकती हैं या आसक्ति पैदा कर सकती हैं। एक 'तत्वदर्शी' – यानी सत्य को देखने वाला – इन इंद्रिय सुखों को बाधा या बीमारी की तरह देखता है, क्योंकि ये उसे अपनी मूल खोज से दूर ले जा सकते हैं। यह हमें क्षणिक सुखों से हटकर आत्म-चिंतन और उच्च लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है।

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