જ્ઞાનીને તો સર્વે ફોક
બ્રહ્માદિલગી કલ્પ્યાં લોક;
“To the wise, all is but vain,From Brahma's realms, all but conceived in pain.”
— अखा भगत
अर्थ
ज्ञानी व्यक्ति के लिए सब कुछ व्यर्थ है, ब्रह्मा आदि द्वारा कल्पित सभी लोक भी निरर्थक हैं।
विस्तार
यह दोहा कहता है कि एक सच्चे ज्ञानी या प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, दुनिया की हर चीज़ क्षणभंगुर और अंततः सारहीन मानी जाती है। ब्रह्मा जैसे महान निर्माता से लेकर उन सभी लोकों और अनुभवों तक जिनकी हम कल्पना करते हैं, ज्ञानी उन्हें अस्थायी और मायावी समझते हैं। यह अस्वीकृति नहीं है, बल्कि यह गहरी समझ है कि परम सत्य देखी गई वास्तविकता से परे है। यह अस्थायी से परे देखने और कुछ अधिक गहन खोजने का निमंत्रण है, अस्तित्व के भ्रमों को भेदकर एक गहरी, अपरिवर्तनीय वास्तविकता को समझने का आह्वान है।
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