સ્વામી થઇને બેઠો આપ
એ તો મનને વળગ્યું પાપ;
“You sit, having become a master,That indeed is a sin clung to the mind.”
— अखा भगत
अर्थ
आप स्वामी बनकर बैठ गए हैं, यह तो मन से चिपका हुआ पाप है।
विस्तार
यह दोहा हमें अहंकार के जाल से सावधान करता है। इसका अर्थ है कि जब हम खुद को किसी चीज़ का 'स्वामी' या अंतिम नियंत्रक मानने लगते हैं, तो यह वास्तव में हमारे मन से जुड़ा एक दोष या 'पाप' है। यह हमें विनम्रता अपनाने और यह समझने की याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति आत्म-घोषित प्रभुत्व से नहीं, बल्कि अहंकार को त्यागने से आती है। स्वयं को एकमात्र कर्ता या मालिक मानना मन पर बोझ डालता है, जो वास्तविक आध्यात्मिक उन्नति में बाधक है।
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