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ग़ज़ल

Akha Bhagat 15

اکھا بھگت ۱۵
अखा भगत· Ghazal· 6 shers

“अखा भगत 15” का यह अंश सतही ज्ञान पर सच्ची आध्यात्मिक समझ के महत्व पर जोर देता है। यह बताता है कि कैसे शुकदेव द्वारा परीक्षित को सुनाई गई कथा जैसी सच्ची कहानियाँ ईश्वर प्राप्ति की ओर ले जाती हैं। कवि निष्काम मार्ग को सांसारिक इच्छाओं के कष्टों से श्रेष्ठ बताते हुए वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान को अपनाने का आग्रह करते हैं।

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1
ખરે આપી તેજીને પેર એવું જાણી અખા જુતો ઘેર.
सचमुच, तीव्र आसक्ति के तरीके को त्यागकर, अखा, यह जानते हुए घर जाओ।
2
કથા કરી તે શુકજી ખરી પરીક્ષિતને મેળવ્યા હરિ;
शुकदेव जी ने वह कथा सत्यता से सुनाई और परीक्षित को हरि प्राप्त हुए।
3
શીખ થઇ ત્યારે આપ્યું શું નગ્ન થઇ ગયા વનમાં પશુ;
जब तुम शिष्य बने तब तुमने क्या दिया? जंगल में पशु नग्न हो गए।
4
નિસ્પૃહીની એવી છે કથા અખા બીજી પેટ ભર્યાની વ્યથા.
इच्छा-रहित व्यक्ति की गाथा ऐसी है, अखा, बाकी सब तो केवल पेट भरने की व्यथा है।
5
રઘુ જદુ રાજની વાતજ કહે દત્ત ભરતનું ઓઠું લહે ;
रघु और यदु के शाही किस्से सुनाए जाते हैं। दत्त भरत के वचनों को ग्रहण करता है।
6
અજગરવરતી વનમાં પડ્ યા તે ક્યાંઇથી આવી ચડ્ યા;
अजगर की तरह, जंगल में पड़े रहने पर भी, उनकी सभी ज़रूरतें कहीं-न-कहीं से पूरी हो जाती हैं।
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