દે હાભિમાન હતું પાશેર
વિધા ભણતાં વાધ્યું શેર;
“My body-pride was but a quarter-kilo,While studying knowledge, it grew to a kilo;”
— अखा भगत
अर्थ
मेरा शारीरिक अभिमान पहले एक चौथाई किलो था, लेकिन विद्या प्राप्त करने पर वह बढ़कर एक किलो हो गया।
विस्तार
यह दोहा कहता है कि हमारा शुरुआती देहाभिमान, या शरीर के प्रति लगाव, बहुत कम था। लेकिन जैसे-जैसे हमने शिक्षा प्राप्त की, यह अहंकार बहुत बढ़ गया। यह एक गहरा अवलोकन है कि ज्ञान, विनम्रता बढ़ाने की बजाय, कभी-कभी हमारे आत्म-महत्व या घमंड को कैसे बढ़ा सकता है। सच्ची शिक्षा हमें ब्रह्मांड में अपनी छोटी सी जगह को समझने और विनम्रता व करुणा की भावना जगाने की ओर ले जानी चाहिए, न कि हमारे अहंकार को बढ़ाने की ओर। यह हमें याद दिलाता है कि हम अपनी सीख को कैसे धारण करें।
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