“The scriptures possess but one eye,This vision of experience has not yet opened.”
शास्त्रों की तो बस एक ही आँख है, और अनुभव की यह दृष्टि अभी तक खुली नहीं है।
यह दोहा बताता है कि शास्त्रों में भले ही एक ही प्रकार की महत्वपूर्ण दृष्टि या ज्ञान मिलता हो, पर अनुभव से मिलने वाली गहरी समझ की आँख अभी तक पूरी तरह से खुली नहीं है। यह ऐसा है जैसे आपके पास नक्शा तो है, पर आपने खुद उस जगह को नहीं देखा। हम किताबों से ज्ञान तो प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन सच्ची बुद्धिमत्ता और अंतर्दृष्टि, जिसे 'अनुभव की आँख' कहते हैं, तभी खुलती है जब हम जीवन के अनुभवों से सीखते हैं और उन्हें अपने जीवन में उतारते हैं। यह सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान से आगे बढ़कर गहरे, वास्तविक समझ तक पहुँचने की बात है।
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