“Akha, why should the wise fear the worldly cycle?Whose wings of experience soar in the sky.”
अखा, ज्ञानी संसार के चक्र से क्यों डरे, जिसकी अनुभव की पाँखें आकाश में विचरण करती हैं?
यह सुंदर दोहा पूछता है, "अखा, एक ज्ञानी व्यक्ति भला इस संसार के बंधनों से क्यों डरेगा?" इसका उत्तर यह है कि जिसकी अनुभव रूपी पंख आकाश में फड़फड़ा रहे हों, वह भला क्यों डरेगा। कल्पना कीजिए एक पक्षी की जो बेफिक्र होकर आकाश में उड़ रहा है, उसे ज़मीन की चिंताओं से कोई भय नहीं होता। ठीक इसी तरह, जिसने जीवन के अनुभवों से गहरा ज्ञान और सच्ची समझ प्राप्त कर ली है, वह संसार के अस्तित्व या उसकी चुनौतियों से नहीं डरता। उसकी बुद्धि उसे भय से ऊपर उठा देती है, उसे एक विस्तृत दृष्टिकोण और मुक्ति का एहसास देती है। वह वास्तविकता की प्रकृति को समझता है, जिससे वह निडर और स्वतंत्र हो जाता है।
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