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વેલ ન દીસે દીસે પાન
દીસે કીરણ ન દીસે ભાન;

No vine is seen, yet leaves appear, Rays are seen, yet the sun is not clear;

अखा भगत
अर्थ

बेल नहीं दिखती, पत्ते दिखते हैं; किरणें दिखती हैं, सूरज नहीं दिखता।

विस्तार

यह दोहा हमें यह सिखाता है कि कुछ चीजें भले ही हमें सीधे दिखाई न दें, लेकिन उनके प्रभाव और निशान हर जगह मौजूद होते हैं। जरा सोचिए, एक बेल को आप पूरी तरह से शायद न देख पाएं, पर उसके पत्ते तो आपको साफ दिखते हैं। ठीक वैसे ही, कभी-कभी सूरज खुद बादलों में छिपा हो सकता है या दिन ढल रहा हो, पर उसकी किरणें, उसका प्रकाश तो हमें हमेशा महसूस होता है और दिखाई देता है। यह छंद हमें याद दिलाता है कि मूल स्रोत या परम सत्य अक्सर अदृश्य रहता है, लेकिन उसकी मौजूदगी, उसके संकेत और उसके प्रभाव हमारे आस-पास हर चीज़ में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। यह हमें गहरे अर्थों को समझने और हर छोटी चीज में बड़ी सच्चाई को खोजने की प्रेरणा देता है।

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