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પાછો વળી ઘડાયે ઘાટ
તેમનો તેમ પોગરનો ઠાઠ.

The form can be reformed again, Yet the flower's glory will remain.

अखा भगत
अर्थ

आकार को फिर से गढ़ा जा सकता है, फिर भी फूल की शोभा वैसी ही बनी रहती है।

विस्तार

यह दोहा खूबसूरती से समझाता है कि यदि किसी वस्तु को पिघलाकर नया आकार दे भी दिया जाए, तब भी उसका मूल सार या उसकी आंतरिक महिमा वैसी ही रहती है। इसे ऐसे समझिए जैसे सोना: आप एक सोने के गहने को पिघलाकर कोई और डिज़ाइन बना सकते हैं, लेकिन वह फिर भी शुद्ध सोना ही रहेगा। उसका मूल गुण, उसका आंतरिक मूल्य, बाहरी रूप बदलने से नहीं बदलता। यह हमें सिखाता है कि सच्चा चरित्र और आंतरिक मूल्य अपरिवर्तनीय होते हैं, चाहे परिस्थितियां या बाहरी रूप कितने भी बदल जाएं। जो अंदर से वास्तव में मूल्यवान है, वह हमेशा अपनी मूल चमक बरकरार रखता है।

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