તેમ ભવસાગર હરિસાગર થયો
જ્યારે આપોપાનો ભારજ ગયો;
“Then the ocean of life transformed to God's vast sea,When the burden of one's own self was set free.”
— अखा भगत
अर्थ
जब अपने आप का बोझ चला गया, तब भवसागर हरिसागर बन गया।
विस्तार
यह प्यारा दोहा हमें जीवन का एक गहरा सत्य सिखाता है। यह कहता है कि 'संसार का सागर,' जो चुनौतियों और बंधनों से भरा लगता है, वह 'ईश्वर के आनंद के सागर' में बदल सकता है। यह अद्भुत परिवर्तन तब होता है जब हम अपने अहंकार का भार, अपने 'मैं' और 'मेरा' का बोझ छोड़ देते हैं। जब हम अपने आपे के भार से मुक्त हो जाते हैं, तो यह संसार, जो कभी अशांत समुद्र जैसा लगता था, अचानक एक शांत और धन्य विस्तार बन जाता है, जो ईश्वर की उपस्थिति से परिपूर्ण है। यह स्वयं को समर्पित करके सच्ची मुक्ति पाने का मार्ग है।
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