“O Akha, Brahman is all names, Within it, villages are distinct and apart;”
हे अखा, ब्रह्म ही सभी नाम है। उसी के भीतर गाँव अलग-अलग हैं।
अखा भगत का यह दोहा हमें एक गहरा सत्य समझाता है: मूल रूप से, सब कुछ ब्रह्म ही है, जो परम वास्तविकता है। इसे ऐसे समझें जैसे कोई विशाल, अखंड भूमि हो। भले ही पूरी भूमि एक हो, हम उस पर सीमाएँ बना लेते हैं और कुछ क्षेत्रों को 'गाँव' कह देते हैं। ठीक उसी तरह, जबकि सृष्टि की हर चीज़ एक ही दिव्य तत्व से उत्पन्न हुई है और उसी का सार है, हमारा मन, हमारे नाम और हमारी धारणाएँ उनमें भेद पैदा कर देती हैं। हमें अलग-अलग चीजें, लोग या अनुभव दिखाई देते हैं। लेकिन अखा चाहते हैं कि हम याद रखें कि इन सभी प्रकट भिन्नताओं के नीचे एक मूलभूत एकता है, एक अद्वितीय चेतना है जो हम सबको जोड़ती है। यह अनेक में एक को पहचानने की बात है।
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