“Akha, those who understand this are indeed great saints; Vedanta proclaims Satchitananda to them.”
अखा कहते हैं कि जो इसे समझते हैं, वे निश्चित रूप से महान संत हैं। वेदान्त उन्हें सच्चिदानन्द कहता है।
अखाजी हमें एक गहरा रहस्य समझा रहे हैं। वे कहते हैं कि जो व्यक्ति इस मौलिक सत्य को समझ जाता है, वही सच्चा महान संत है। और यह सत्य क्या है? यह वही बोध है जिसे वेदांत 'सत्-चित्-आनंद' कहता है – अर्थात्, शुद्ध अस्तित्व, शुद्ध चेतना और शुद्ध परमानंद। इसका मतलब है अपने हृदय में यह जानना कि आपका वास्तविक स्वरूप, आपका मूल तत्व, यही शाश्वत, चेतन और आनंदमय सत्य है। जब आप इसे समझ लेते हैं, तो आप अपने भीतर की दिव्य चिंगारी को पहचानते हैं, जिससे आपका जीवन गहरी शांति और खुशी से भर जाता है। यह अपनी परम सच्चाई को खोजने जैसा है।
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