દૈ વી તો છે ધણીનું રૂપ
અખા આસુરી ઉંડો કૂ પ.
“The divine truly is the Master's form;Akha, the demonic is a deep well.”
— अखा भगत
अर्थ
दैवीय तो सचमुच प्रभु का रूप है; अखा, आसुरी एक गहरा कुआँ है।
विस्तार
यह दोहा दैवी और आसुरी गुणों के स्वरूप को समझाता है। संत कवि अखा कहते हैं कि दैवी गुण, जैसे प्रेम, करुणा और शांति, ईश्वर का ही रूप हैं। ये हमें सद्गति और प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इसके विपरीत, आसुरी गुण, जैसे क्रोध, लालच और अहंकार, एक गहरे कुएँ के समान हैं। जो एक बार इस कुएँ में गिर जाता है, उसके लिए बाहर निकलना अत्यंत कठिन हो जाता है। इसका अर्थ है कि नकारात्मक प्रवृत्तियाँ हमें गहरे दुःख और अंधकार में धकेल देती हैं, जहाँ से मुक्ति पाना दुष्कर है। यह छंद हमें दैवी मार्ग अपनाने और आत्मिक उन्नति की प्रेरणा देता है।
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