અટળ વસ્તુને અહોનિશ ધાય
ટળને બાંધણે બાંધ્યો ન જાય;
“Towards the eternal it rushes day and night,By transient bonds, it cannot be bound.”
— अखा भगत
अर्थ
वह अटल वस्तु की ओर दिन-रात दौड़ता है। उसे नश्वर बंधनों से बांधा नहीं जा सकता।
विस्तार
यह दोहा हमें एक ऐसे अटल और शाश्वत सत्य का बोध कराता है, जिसकी खोज में हम सभी दिन-रात लगे रहते हैं। हम लगातार इसकी ओर आकर्षित होते हैं और इसे पाने का प्रयास करते हैं। किंतु यह इतना गहरा और असीम है कि इसे किसी भी क्षणभंगुर, सांसारिक बंधन या हमारी सीमित कोशिशों से बांधा नहीं जा सकता। यह हमें बताता है कि परम सत्य हमारी सभी अस्थायी रचनाओं और प्रयासों से परे है, जो सदा मुक्त और स्वतंत्र रहता है।
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