એ તો અખા બહુ ઉત્પાત
ઘણા પરમેશ્વર એ ક્યાંની વાત.
“O Akha, this is much trouble,Whence this talk of many Gods?”
— अखा भगत
अर्थ
हे अखा, यह तो बहुत उत्पात है। अनेक परमेश्वर होने की यह बात कहाँ की है?
विस्तार
अखा इस दोहे में एक बड़ी अशांति या उत्पात पर अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। वे इस विचार पर सवाल उठाते हैं कि 'कई परमेश्वर' कैसे हो सकते हैं, पूछते हैं कि 'यह कैसी बात है?' उनका तात्पर्य है कि अनेक सर्वोच्च शक्तियों में विश्वास करने से केवल भ्रम और अव्यवस्था ही पैदा होती है, चाहे वह ईश्वर की समझ हो या दुनिया की। अखा के लिए, सच्ची आध्यात्मिक स्पष्टता और शांति शायद एक एकीकृत, अविभाज्य स्रोत को पहचानने से आती है, न कि अनेक खंडित देवताओं से। यह दोहा हमें परमात्मा की सरलता और एकता पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
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