સત્ય સંકલ્પ ને અમ્મર કાય
સર્વ રૂપ જાણે મહિમાય;
“With true resolve and an imperishable form, one understands the glory in all forms.”
— अखा भगत
अर्थ
सत्य संकल्प और अमर काया के साथ, व्यक्ति सभी रूपों में निहित महिमा को समझता है।
विस्तार
यह दोहा एक दिव्य, शाश्वत सत्ता का अद्भुत वर्णन करता है। यह ऐसे सिद्धांत या अस्तित्व की बात करता है जिसकी इच्छा सत्य पर आधारित और अटल है, और जिसका रूप कभी नष्ट नहीं होता। सृष्टि का हर कण, हर रूप, इसकी असीम महिमा और महानता को जानता और पहचानता है। यह एक ऐसे सार्वभौमिक सत्य, एक सर्वोच्च शक्ति की ओर इशारा करता है जो स्थिर, सच्चा और हर जगह मौजूद है, जिसकी भव्यता पूरी सृष्टि में स्पष्ट है। यह उस परम सत्य को स्वीकार करने की बात है जो सब पर शासन करता है।
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