ત્યારે અખા મુમુક્ષુ મન
જાણે તે જાણી લે જન.
“Then, O Akho, the soul that yearns to be free,That which it knows, let that person see.”
— अखा भगत
अर्थ
तब, हे अखा, मोक्ष की इच्छा रखने वाला व्यक्ति, जो कुछ उसका मन जानता है, उसे जान ले।
विस्तार
संत कवि अखा का यह दोहा एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है। अखा कहते हैं कि 'मुमुक्षु मन' यानी वह मन जो वास्तव में मोक्ष या आध्यात्मिक मुक्ति की इच्छा रखता है, वही सच्चा ज्ञान प्राप्त कर सकता है। वे लोगों को इस गहन सत्य को पहचानने और आत्मसात करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस चौपाई का अर्थ है कि जब हमारा मन सांसारिक मोहमाया से मुक्त होकर सच्ची लगन से सत्य की खोज करता है, तभी हम परम सत्य को समझ पाते हैं। यह एक मधुर स्मरण है कि सच्ची लगन ही वास्तविक समझ और आंतरिक शांति की कुंजी है।
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