“To the experienced, arguments are but words, Like a weak hedge a camel disregards.”
अनुभवी व्यक्ति के सामने तर्क केवल शब्द होते हैं, जैसे ऊँट के आगे कमजोर बाड़ व्यर्थ होती है।
यह गुजराती दोहा बहुत खूबसूरती से बताता है कि अनुभवी व्यक्ति से बहस करना कितना व्यर्थ है। इसका मतलब है कि किसी अनुभवी व्यक्ति के सामने तर्क करना ऐसा है जैसे एक छोटी बाड़ ऊंट को रोकने की कोशिश कर रही हो। जैसे ऊंट एक छोटी बाड़ को आसानी से पार कर जाएगा या तोड़ देगा, वैसे ही एक अनुभवी व्यक्ति का ज्ञान और समझ आपके तर्कों को अप्रभावी बना देगी। यह हमें विनम्रता का महत्व सिखाता है, सुझाव देता है कि बहस करने के बजाय, हमें उन लोगों से सुनना और सीखना चाहिए जिन्होंने हमसे पहले रास्ता तय किया है। उनकी अंतर्दृष्टि अक्सर गहरी होती है और सतही तर्कों से आसानी से नहीं हारती।
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