“Why should the wise Akha ever fear? Whose wing of experience soars through the sky.”
ज्ञानी अखा भला भय से क्यों डरे? जिसकी अनुभव रूपी पंख आकाश में विचरण करती है।
यह सुंदर दोहा पूछता है, 'अखा जैसा ज्ञानी व्यक्ति भला भयभीत क्यों हो?' और तुरंत इसका उत्तर भी देता है, 'क्योंकि उसके अनुभव के पंख आकाश में ऊँची उड़ान भरते हैं।' इसका अर्थ है कि एक सच्चा ज्ञानी और अनुभवी व्यक्ति, अखा की तरह, डर से कभी विचलित नहीं होता। जीवन के विशाल अनुभवों से बनी उसकी गहरी समझ उसे अद्वितीय साहस और स्थिरता प्रदान करती है। उसने इतना देखा है, इतना सीखा है और इतना विकसित हुआ है कि वह आत्मविश्वास के साथ किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। ठीक वैसे ही जैसे एक पक्षी आकाश में सहजता से उड़ता है, नीचे की किसी चीज़ से नहीं डरता। उसकी आंतरिक बुद्धि उसे निर्भय बनाती है।
ऑडियो
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
