“A deep well with its lining rent, All that was learned, to no good spent.”
गहरे कुएँ की दीवार फटी होने पर जिस तरह पानी नहीं रुकता, उसी तरह सीखा और सुना हुआ सब व्यर्थ हो जाता है।
यह दोहा एक सुंदर और गहरी बात कहता है: "गहरा कुआँ और फटी हुई बाल्टी।" कल्पना कीजिए एक कुआँ ज्ञान या बुद्धिमत्ता से भरा है, लेकिन अगर आपकी बाल्टी फटी हुई है, तो आप उससे पानी नहीं निकाल सकते और न ही उसे रोक सकते हैं। इसी तरह, यह कहावत बताती है कि जो कुछ भी आप सीखते या सुनते हैं, वह सब व्यर्थ हो जाता है यदि आप उसे याद नहीं रख सकते, समझ नहीं सकते, या उसका उपयोग नहीं कर सकते। यह सिर्फ जानकारी इकट्ठा करने के बजाय उसे समझने, याद रखने और व्यवहार में लाने के महत्व पर जोर देता है। बिना धारण शक्ति के, ज्ञान का सबसे गहरा कुआँ भी आपकी प्यास नहीं बुझा पाएगा।
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