जीवन और मरण का हर क्षण मुझे भाता है,कि ज़हर भी भाता है, मरण मुझे भाता है।
“Every moment of life and death, to me is dear,For even poison I like, and death itself is dear.”
— अमृत घायल
अर्थ
कवि को जीवन और मृत्यु का हर पल पसंद है। उन्हें ज़हर और स्वयं मृत्यु भी प्रिय है।
विस्तार
यह शेर जीवन और मृत्यु के गहरे दार्शनिक संबंध को बयान करता है। शायर कहते हैं कि जीवन का हर पल और मरण का हर क्षण... सब कुछ हमें भाता है। ज़हर को भी अपना मान लेना, या मौत को भी गले लगा लेना, यह दिखाता है कि शायर ने जीवन के डर को कहीं पीछे छोड़ दिया है। यह एक अद्भुत तरह का समर्पण है!
