ग़ज़ल
લિજ્જત છે
લઈજ્જત છે
यह ग़ज़ल स्त्री की गरिमा और सम्मान के महत्व को दर्शाती है। कवि ने बताया है कि एक महिला का सम्मान उसके चरित्र और व्यवहार में निहित होता है, जिसे बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
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1
ગભરુ આંખોમાં કાજળ થઈ, લહેરાઈ જવામાં લિજ્જત છે.
ચર્ચાનો વિષય એ હોય ભલે, ચર્ચાઈ જવામાં લિજ્જત છે!
गभरु आँखों में काजल होकर, लहरा जाने में लज़्ज़त है।चर्चा का विषय वो हो भले, चर्चा में आ जाने में लज़्ज़त है!
शर्मीली आँखों में काजल बनकर लहराने में सुख है। भले ही कोई चर्चा का विषय बन जाए, चर्चा में होने में ही आनंद है।
2
વેચાઈ જવા કરતાંય વધુ વહેંચાઈ જવામાં લિજ્જત છે,
હર ફૂલમહીં ખુશ્બો પેઠે ખોવાઈ જવામાં લિજ્જત છે.
बिक जाने से कहीं ज़्यादा बँट जाने में लज्जत है,हर फूल में खुशबू की तरह खो जाने में लज्जत है।
बिकने के बजाय बंट जाने में अधिक आनंद है। हर फूल में खुशबू की तरह खो जाने में ही वास्तविक मज़ा है।
3
પરવાના પોઢી જાયે છે ચિર મૌનની ચાદર ઓઢીને,
હે દોસ્ત, શમાની ચોખટ પર ઓલાઈ જવામાં લિજ્જત છે.
परवाना सो जाता है चिर मौन की चादर ओढ़कर,हे दोस्त, शमा की चौखट पर बुझ जाने में लज्जत है।
परवाना चिर मौन की चादर ओढ़कर सो जाता है। हे दोस्त, शमा की चौखट पर बुझ जाने में ही मज़ा है।
4
દુ:ખ પ્રીતનું જ્યાં ત્યાં ગાવું શું? ડગલે પગલે પસ્તાવું શું?
એ જો કે વસમી ઠોકર છે પણ ખાઈ જવામાં લિજ્જત છે.
दुःख प्रेम का क्यों हरसू गाएँ? कदम-कदम पर क्यों पछताएँ?यह यद्यपि है मुश्किल ठोकर, पर खाने में ही लज़्ज़त है।
प्रेम के दुख को हर जगह क्यों गाएं और हर कदम पर क्यों पछताएं? यद्यपि यह एक कठिन ठोकर है, इसे सहन करने में ही आनंद है।
5
જે અંધ ગણે છે પ્રેમને તે આ વાત નહીં સમજી જ શકે;
એક સાવ અજાણી આંખથી પણ અથડાઈ જવામાં લિજ્જત છે!
जो अंध समझते हैं प्रेम को, वे यह बात नहीं समझ पाएँगे;एक बिलकुल अनजानी आँख से भी टकराने में लज़्ज़त है!
जो लोग प्रेम को अंधा समझते हैं, वे इस बात को कभी नहीं समझ पाएंगे। एक बिल्कुल अंजान आँख से भी टकराने में एक खास आनंद होता है।
6
બે વાત કરીને પારેવાં થૈ, જાયે છે આડાંઅવળાં,
કૈં આમ પરસ્પર ગૂંથાઈ, વીખરાઈ જવામાં લિજ્જત છે!
दो बातें करके परिंदे बन जाते हैं, उड़ते हैं आड़े-तिरछे, कुछ यूं ही आपस में गुँथकर, बिखर जाने में क्या लज्जत है!
दो बातें करके वे कबूतरों की तरह इधर-उधर उड़ जाते हैं। एक-दूसरे से इस तरह गुंथकर और फिर बिखर जाने में क्या मज़ा है!
7
સારાનરસાનું ભાન નથી પણ એટલું જાણું છું ‘ઘાયલ’,
જે આવે ગળામાં ઊલટથી એ ગાઈ જવામાં લિજ્જત છે.
भले-बुरे का भान नहीं पर इतना जानता हूँ ‘घायल’,जो आए कंठ में उमंग से, उसे गाने में लज़्ज़त है।
कवि 'घायल' कहते हैं कि उन्हें भले-बुरे का कोई भान नहीं है। परंतु वे इतना जानते हैं कि जो कुछ भी उमंग से उनके कंठ में आता है, उसे गाने में ही वास्तविक आनंद है।
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