मैं जिन्हें अपनी साँस समझ रहा था,‘घायल’, वो साँसें मौत का फ़रमान निकलीं।
“Those whom I took to be my very breath,‘Ghayal’, those breaths became decrees of death.”
— अमृत घायल
अर्थ
'घायल' जिन्हें अपनी साँस समझ रहे थे, दुर्भाग्य से वे ही साँसें मृत्यु का फ़रमान निकलीं।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे, दार्शनिक अहसास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जिन्हें हम अपनी साँस मानकर जी रहे हैं, वो असल में मौत का फ़रमान हैं। यह एक ऐसा भयानक सच है, जिस पर सोचने के लिए हमें मजबूर होना पड़ता है। शायर हमें अपनी ही ज़िंदगी और साँसों के मतलब पर सवाल उठाने को कह रहे हैं।
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