मध्य में जीना कभी रास नहीं आया,मैं सदा अपने ही ढंग से जिया हूँ।
“To live within the mainstream, it never pleased,I have always lived life on my own terms.”
— अमृत घायल
अर्थ
मुझे कभी भी मध्यधारा में जीना पसंद नहीं आया; मैं हमेशा अपनी मर्जी से ही जिया हूँ।
विस्तार
यह शेर आत्म-सम्मान और अपनी पहचान को बनाए रखने की ज़िद है। शायर कह रहे हैं कि ज़िंदगी में कहीं भी 'बीच का रास्ता' अपनाना, कहीं भी समझौता करना, उन्हें कभी पसंद नहीं आया। उनके लिए, जीवन का सार सिर्फ़ अपने ढंग से जीना है, अपनी शर्तों पर जीना है। यह न सिर्फ़ एक बात है, यह एक ज़िद है!
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