फैले बिना मैं हर सू छाया हूँ! मैं अजब ढंग से घायल हुआ हूँ!
“Unspread, I pervade everywhere!I am wounded in a wondrous way!”
— अमृत घायल
अर्थ
विस्तार के बिना मैं हर जगह छाया हुआ हूँ! मैं एक अद्भुत तरीके से घायल हुआ हूँ!
विस्तार
ये शेर ज़ाहिरी तौर पर बहुत गहरा है। शायर कह रहे हैं कि मेरी मौजूदगी इतनी फैल चुकी है कि मुझे हर जगह महसूस किया जाता है, बिना किसी कोशिश के। और ये घायल होना भी कोई आम ज़ख्म नहीं है—यह एक ऐसा दर्द है जो अंदरूनी है, जो दिखता नहीं, लेकिन हर साँस में महसूस होता है। ये एहसास ही ज़िंदगी की सबसे बड़ी उलझन है।
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