मनचाहे ढंग से आकाश में उछालती रही,
मैं कहीं नहीं और अदृश्य की गोफण में जा पड़ा।
“She kept flinging me into the sky as she pleased, I was nowhere, and landed in the sling of the unseen.”
— अमृत घायल
अर्थ
वह मुझे अपनी मर्ज़ी से आकाश में उछालती रही, और मैं कहीं न रहकर अदृश्य की गोफन में जा फँसा।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी और मोहब्बत की एक बहुत गहरी उलझन को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब ने हमें मनचाहे ढंग से आसमान में उड़ाया, यानी ज़िंदगी बहुत खूबसूरत और ऊँची थी। लेकिन अंत में, हमें कोई ठिकाना नहीं मिला; हम तो अदृश्य की गोफण में जा पड़े। यह वो एहसास है जब आप सब कुछ पा लेते हैं, लेकिन आपका कहीं कोई अस्तित्व नहीं रह जाता।
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