सुलग रहा है स्वप्न-गगन, शाम तो देखो! मानो खड़ी है ज्वाला, भेंट के स्वांग में!
“The dream-sky is ablaze, just behold the eve! As if a fierce fire stands, in sweet offerings' guise!”
— अमृत घायल
अर्थ
सपनों का आकाश जल रहा है, ज़रा शाम तो देखो! ऐसा लगता है मानो कोई भयंकर आग उपहारों के वेश में खड़ी हो।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही गहरा एहसास बयां करता है। शायर कहते हैं कि सपनों का आसमान जल रहा है, यानी कोई खुशी या उम्मीद अब बाकी नहीं। जो 'ज्वाला' दिख रही है, वह किसी भेंट या मुलाकात के रूप में है, पर यह आग सिर्फ़ धोखा है। यह बताता है कि जीवन में सबसे खूबसूरत पल भी कितने दर्दनाक और भ्रामक हो सकते हैं।
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