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दिलासे की थी ज़रूरत, वो दिन गए कब के बीत,अब क्या काम के मेरे ये अवसर बाद के छींटे?

I needed solace, but those days are long past, Of what use are these drops to me after the moment has passed?

अमृत घायल
अर्थ

मुझे दिलासे की ज़रूरत थी, लेकिन वो दिन तो कब के गुज़र चुके हैं। अब जब ज़रूरत का वक़्त बीत गया है, तो ये बाद में मिलने वाले कुछ छींटे मेरे किसी काम के नहीं।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब कोई चीज़ या मौका बहुत देर से मिलता है। शायर कह रहे हैं कि जिन्हें सहारा चाहिए था, वो दिन कब के गुजर गए। अब जो भी मौके या तसल्ली मिलती है, वो किसी काम की नहीं, बस बाद में बिखरने वाले छींटों जैसी है। यह समय की अहमियत पर एक गहरा विचार है।

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