खोजते थे मुझमें 'घायल' वे सब अपनी रीति से,कहाँ अब भी शब्द हैं दोषपूर्ण, मुझे मालूम है।
“They were all trying to find fault with 'Ghayal' in their own way,Where are the words still flawed, I know, to this day.”
— अमृत घायल
अर्थ
वे सब अपने-अपने तरीके से 'घायल' में खामियां ढूंढ रहे थे। असल में कहां शब्द अभी भी त्रुटिपूर्ण हैं, यह मुझे पता है।
विस्तार
यह शेर गहरे निराशा और आत्म-जागरूकता की बात करता है। शायर कहते हैं कि लोग हमेशा किसी आदर्श चीज़ को, कोई सही जवाब, मुझमें अपनी ही नज़रों से खोजते रहे। लेकिन अब उन्हें वो कड़वा सच पता चला है कि वे जो 'शब्द' ढूंढ रहे हैं, वो अपने आप में ही दोषपूर्ण हैं। यह एक बहुत ही दर्दनाक इक़रार है।
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