कही ढोंगियों को समझाए उसे,कहीं फिर विद्रोह न पुकार बैठे।
“Speak and make the hypocrites understand him,Lest he again declare a rebellion.”
— अमृत घायल
अर्थ
दंभियों को समझाओ और उसे भी समझाइए, ताकि वह फिर से विद्रोह न छेड़ दे।
विस्तार
यह दोहा एक चेतावनी भरी सलाह देता है। यह सुझाता है कि पाखंडी व्यक्तियों को समझाने या उनसे तर्क करने की कोशिश करना उल्टा पड़ सकता है। चेतावनी यह है कि ऐसे प्रयास न केवल उनका मन बदलने में असफल हो सकते हैं, बल्कि इसके बजाय उन्हें भड़का सकते हैं। डर यह है कि उनसे उलझकर, आप अनजाने में उन्हें और अधिक कलह पैदा करने या 'फिर से विद्रोह भड़काने' के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। इसका अर्थ है कि कभी-कभी, आगे की परेशानी से बचने के लिए कपटी लोगों को अकेला छोड़ देना समझदारी होती है, क्योंकि टकराव उनकी विघटनकारी प्रवृत्तियों को केवल बढ़ावा दे सकता है।
