मुबारक तुम्हें फूलों की जवानी, हमें न तोलो तिनके के तोले!
“May the youth of flowers be blessed upon you, Do not weigh us equal to a blade of grass!”
— अमृत घायल
अर्थ
तुम्हें फूलों की जवानी मुबारक हो; हमें घास के तिनके के बराबर मत तोलो।
विस्तार
यह दोहा आत्म-सम्मान का एक सशक्त संदेश देता है। इसमें वक्ता दूसरों से कहता है, "आपको फूलों की जवानी, उनकी सुंदरता और चमक मुबारक हो, आप उनका आनंद लीजिए।" लेकिन फिर एक दृढ़ अनुरोध करता है: "हमें एक छोटे से तिनके के बराबर मत तोलिए।" यह एक मार्मिक विनती है कि उन्हें उनके वास्तविक मूल्य के लिए देखा जाए, उन्हें किसी तुच्छ वस्तु से तुलना करके कम न आंका जाए। वक्ता का मानना है कि वे इतने मामूली समझे जाने के बजाय अधिक सम्मान और पहचान के हकदार हैं। यह अपनी उचित सराहना पाने की इच्छा को उजागर करता है।
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