ज़ख़्म ख़ुद ज़ख़्म का मरहम हो गया है;कई बार ऐसा भी भ्रम हो गया है।
“The wound itself has become the balm for the wound;Many a time, such an illusion has occurred.”
— अमृत घायल
अर्थ
घाव खुद घाव का मरहम बन गया है; कई बार ऐसा भ्रम भी हो गया है।
विस्तार
यह शेर हमें बताता है कि जीवन में घाव भी कभी-कभी खुद ही अपना मरहम बन जाते हैं। यह सुनकर थोड़ा भ्रम हो सकता है, लेकिन इसका गहरा अर्थ है। जब हम किसी मुश्किल दौर से गुजरते हैं या कोई दर्द लंबे समय तक सहते हैं, तो वही अनुभव धीरे-धीरे हमें मजबूत बना देता है। जिस चीज़ से हमें कभी बहुत तकलीफ हुई थी, वही हमें उससे उबरने की शक्ति दे सकती है। यह दिखाता है कि कैसे हमारी परेशानियाँ हमें भीतर से ठीक होने और बढ़ने में मदद करती हैं। यह उस अजीब और अद्भुत प्रक्रिया के बारे में है जहाँ दर्द ही हमें उपचार की राह दिखाता है।
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