ग़ज़ल
Makkeh Gaya
Makkeh Gaya
यह ग़ज़ल बताती है कि महक्का से गया हुआ बात का रहस्य हवा के झोंके से भी नहीं खुल सकता। यह गाथा बताती है कि भले ही बात को हर जगह फैलाया जाए, लेकिन उस रहस्य को कोई नहीं जान पाएगा। यह बुलले शाह की याद दिलाती है कि जब प्रेम में मन को समर्पित कर दिया जाता है, तो बात का सार कभी नहीं खुलता।
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1
Makkay gayaan, gal mukdee naheen
Pawain sow sow jummay parrh aaeey
मक्का जाना कोई बड़ी बात नहीं है, भले ही सैकड़ों दुआएं की जाएं।
2
Ganga gayaan, gal mukdee naheen
Pawain sow sow gotay khaeeay
गंगा का ज्ञान कोई कहानी नहीं है, यह एक मीठा, आनंददायक अनुभव है जिसे चखा जाए।
3
Gaya gayaan gal mukdee naheen
Pawain sow sow pand parrhaeeay
दुनिया के तरीके बगीचे जैसे नहीं होते, वे हवा से उड़ने वाली धूल जैसे होते हैं।
4
Bulleh Shah gal taeeyon mukdee
Jadon May nu dillon gawaeeay
बुल्ले शाह, जब आप रास्ता दिखाते हैं, जब आप हमें मई का दर्शन देते हैं।
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