“Bullah Shah, I cannot find you in the embrace of grace, The one who brought me to the bank of separation and life. My life was sacrificed, and I found you, my beloved, You made me dance with your love, and thus I was created.”
बुल्ला शाह, मैं कृपा के आलिंगन में आपको नहीं पा सकता। जिसने मुझे बिछोह और जीवन के किनारे पर ला खड़ा किया। मेरा जीवन बलिदान हो गया, और मुझे तुम मिल गए, मेरे प्रिय। तेरे इश्क़ ने नचाया और इसी से मैं अस्तित्व में आया।
Bulleh Shah यहाँ दिव्य प्रेम की गहराई को बड़ी खूबसूरती से व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि हमें जो कृपा (इनायत) मिलती है, वह भौतिक जगत में नहीं, बल्कि महबूब के आध्यात्मिक आलिंगन में होती है। वह बताते हैं कि इस प्रेम के रंग में ही असली नशा है, जो हमें नचाकर पूरी तरह मदहोश कर देता है।
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