39) Jidoon dee may jogi dee hoyee
40) May which may na reh gayee koi
“The wandering ascetic, the divine woman, Has left behind no trace of her passing.”
— बुल्ले शाह
अर्थ
जिदूण की में जोगि की हुई मय व्हिच मय ना रह गई कोई। अर्थ: विक्षिप्त साध्वी और दिव्य नारी ने अपने जाने का कोई निशान नहीं छोड़ा।
विस्तार
Bulleh Shah साहब ने यहाँ भावनाओं के नशे का वर्णन किया है। शायर कहते हैं कि जब व्यक्ति किसी गहन भाव या प्रेम की मदहोशी में होता है, तो वह अपना वास्तविक स्वरूप या जीवन का मार्ग भूल जाता है। यह एक गहरा एहसास है कि कैसे प्रेम या आध्यात्मिक आनंद इतना तीव्र होता है कि वह हमारे होश को भी मदहोश कर देता है। यह हमें सिखाता है कि कभी-कभी खुद को खोना ही हमें कुछ नया खोजने का एहसास कराता है।
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