76) Aye jogi jogi mat wala
77) Hath which Ill’Allah dee mala
“Oh, wandering ascetic, oh, one whose head is adorned, / Your hands wear the sacred garland of Allah.”
— बुल्ले शाह
अर्थ
ऐ योगी, योगी मत वाला, / हाथ में रखी है अल्लाह की माला।
विस्तार
यह शेर बाहरी दिखावे की भक्ति पर एक गहरा तंज़ है। बुलले शाह, एक साधक को संबोधित करते हुए कहते हैं कि वह अल्लाह की माला को यूँ ही किसी को न दे। शायर समझाना चाहते हैं कि सच्ची भक्ति कोई वस्तु नहीं है जिसे बाँटा जा सके। यह एक चेतावनी है कि केवल कर्मकांड या बाहरी प्रतीक मात्र से ईश्वर की कृपा नहीं मिलती, बल्कि हृदय की शुद्धता और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण है।
