Na main bheth mazhab da paaya
Ne main aadam havva jaaya
Na main apna naam dharaaya
Na vich baitthan na vich bhaun
“I neither found the religion, nor did I reach the state of existence; I neither established my own name, nor did I sit in thought or in contemplation.”
— बुल्ले शाह
अर्थ
मैंने न धर्म पाया, न इंसान बना; न अपना नाम स्थापित किया, न विचार में बैठा और न ही चिंतन में।
विस्तार
यह ग़ज़ल के दोहे में बुल्ले शाह ने एक गहन दार्शनिक विचार प्रस्तुत किया है। शायर यहाँ बताते हैं कि सच्ची आध्यात्मिकता को किसी पंथ या पहचान तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह हमें सभी प्रकार के बंधनों और परिभाषाओं से परे जाने का संदेश देता है। बुल्ले शाह हमें सिखाते हैं कि जीवन का सार किसी नाम या जगह में नहीं, बल्कि एक शुद्ध, निस्वार्थ अस्तित्व में है। यह एक अद्भुत स्वतंत्रता का भाव है।
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