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दिल की गिनती न यगानों में, न बेगानों में
लेकिन उस जलवा-गाह-ए-नाज़ से उठता भी नहीं

Not in the counting of the heart, nor in the strangers' count, But even from that spectacle of grace, it does not rise.

फ़िराक़ गोरखपुरी
अर्थ

दिल की गिनती न यगानों में, न बेगानों में। यह तो उस जलवा-गाह-ए-नाज़ से भी नहीं उठता।

विस्तार

यह शेर दिल के उस अनमोल और रहस्यमयी पहलू को छूता है। शायर कहते हैं कि दिल की कीमत न तो महबूब के प्यार से है, न ही दुनिया के तानों से। बल्कि इसकी असली पहचान तो उस 'जलवा' में है, उस नज़ाकत और चमक में जो इसे हर किसी के लिए इतना आकर्षक बना देती है।

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