जिसकी फ़ुरक़त ने पलट दी इश्क़ की काया फ़िराक़
आज उसी ईसा नफ़स दमसाज़ की बातें करो
“Whose separation has changed the very form of love, the separation Today, speak of the words of that same breath, the one that is dying.”
— फ़िराक़ गोरखपुरी
अर्थ
जिसकी बिछड़ने से इश्क़ का रूप ही बदल गया, आज उसी साँस दम तोड़ने वाले का ज़िक्र करो।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ इश्क़ की बात नहीं करता, यह ज़िंदगी के सबसे गहरे दर्द को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जिस फ़िराक़ ने हमारे इश्क़ को ही फ़िराक़ बना दिया.... अब बात महबूब की नहीं, बल्कि उस 'साँस' की है जो हमें ज़िंदा रखती है। यह एक ऐसा एहसास है जब दर्द इतना बड़ा हो जाता है कि वह महज़ मुहब्बत से ऊपर उठकर, वजूद (existence) के सवाल पर आ जाता है!
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