होता है निहाँ गर्द में सहरा मिरे होते
घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मिरे आगे
“The desert gets hidden in dust, while I am present; The river rubs its forehead on the ground, before me.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरे होते हुए रेगिस्तान धूल में छिप जाता है; मेरे सामने दरिया अपना माथा मिट्टी पर रगड़ता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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