“Now is the time if the poor nightingale plays Zulaikha's part,For Joseph, the Rose, makes his beauty known in the garden's market heart.”
अगर बेचारी बुलबुल ज़ुलेख़ा का काम (मोहित होना) करे, तो फूलों का यूसुफ़ (अति सुंदर फूल) चमन के बाज़ार में जलवागर है।
[छोटा ठहराव] वक़्त है गर बुलबुल-ए-मिस्कीं ज़ुलेख़ाई करे, यूसुफ़-ए-गुल जल्वा-फ़रमा है ब-बाज़ार-ए-चमन। अगर बेचारी बुलबुल अपनी गहरी मुहब्बत दिखाना चाहती है, तो यही सही वक़्त है, क्योंकि यूसुफ़ जैसा खूबसूरत फूल बाग़ के बाज़ार में अपनी पूरी चमक दिखा रहा है। शब्द मिस्कीं का मतलब है बेचारा या नम्र, ज़ुलेख़ाई का अर्थ है ज़ुलेख़ा जैसी दीवानगी, और यूसुफ़-ए-गुल का मतलब है यूसुफ़ जैसा हसीन फूल। [आह] मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ हमें सही वक़्त की पहचान करना सिखा रहे हैं। बाग़ में जब फूल अपनी पूरी शान से खिलता है, तो वह एक ऐसा नज़ारा होता है जो रोज़ नहीं मिलता। [छोटा ठहराव] ग़ालिब कहते हैं कि अगर बुलबुल को अपनी मुहब्बत का इज़हार करना है, तो यह सुनहरा मौका है क्योंकि फूल अपनी खूबसूरती की नुमाइश कर रहा है। हम सब की ज़िन्दगी में भी ऐसे लम्हे आते हैं जब कुदरत या हालात हमारे हक़ में होते हैं। उस वक़्त हमें डरना नहीं चाहिए, बल्कि अपनी पूरी शिद्दत के साथ उस लम्हे को जी लेना चाहिए क्योंकि ऐसी बहार बार-बार नहीं आती। यह उस खिलाड़ी की तरह है जिसे मैच की आखिरी गेंद पर छक्का मारना हो, अगर वह उस पल चूक गया तो जीत हाथ से निकल जाएगी और पछतावा रह जाएगा। जब ज़िंदगी अपनी बाहें फैलाकर तुम्हें बुलाए, तो पूरे दिल से उसकी ओर बढ़ जाओ।
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