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शरह-ए-हंगामा-ए-हस्ती है ज़हे मौसम-ए-गुल
रह-बर-ए-क़तरा-बा-दरिया है ख़ोशा मौज-ए-शराब

How glorious the spring, explaining existence's loud clamour,How blessed the wave of wine, guiding the drop to the river.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

बसंत का मौसम कितना शानदार है, जो अस्तित्व के हंगामे की व्याख्या करता है। शराब की लहर कितनी धन्य है, जो एक कतरे को दरिया तक पहुंचाती है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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