उस की उम्मत में हूँ मैं मेरे रहें क्यूँ काम बंद
वास्ते जिस शह के 'ग़ालिब' गुम्बद-ए-बे-दर खुला
“I am of his people, why should my affairs be tied?For that King, Ghalib, the doorless dome opened wide.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं उसकी उम्मत में हूँ, तो मेरे काम क्यों रुके रहें? जिस बादशाह के लिए, ग़ालिब, बिना दरवाज़े का गुंबद खुल गया।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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