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छोड़ी 'असद' न हम ने गदाई में दिल-लगी
साइल हुए तो आशिक़-ए-अहल-ए-करम हुए

Asad, we never abandoned our heart's fondness, even in beggary; When we became seekers, we became lovers of those with true generosity.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

असद, हमने फकीरी में भी अपने दिल की लगन नहीं छोड़ी। जब हम मांगने वाले बने, तो हम नेक दिल और उदार लोगों के प्रेमी बन गए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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