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हुस्न और उस पे हुस्न-ए-ज़न रह गई बुल-हवस की शर्म
अपने पे ए'तिमाद है ग़ैर को आज़माए क्यूँ

Beauty, and her own grace, shamed the desirous eye.Such is my trust in self, why should I try another?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ख़ूबसूरती और उस पर उसका अपना अंदाज़ या ए'तिमाद देखकर लालची व्यक्ति शर्मिंदा हो गया। मुझे खुद पर पूरा भरोसा है, तो मैं दूसरों को क्यों आज़माऊँ?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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