फ़रियाद की कोई लय नहीं है
नाला पाबंद-ए-नय नहीं है
“No melody holds my lament's wild plea, My wail is not bound by the reed-flute's decree.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरी फ़रियाद की कोई निश्चित लय या धुन नहीं है, और मेरा विलाप किसी बांसुरी की धुन का पाबंद नहीं है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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