ग़ाफ़िल ब-वहम-ए-नाज़ ख़ुद-आरा है वर्ना याँ
बे-शाना-ए-सबा नहीं तुर्रा गयाह का
“The unaware, in proud illusion, thinks it self-adorns;Else here, the grass's forelock by breeze's comb is not arranged.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ाफ़िल अपनी सुंदरता के भ्रम में खुद को सजाता है, जबकि यहाँ घास की लट भी सुबह की हवा की कंघी के बिना संवरी नहीं होती।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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