मुझे जुनूँ नहीं 'ग़ालिब' वले ब-क़ौल-ए-हुज़ूर
फ़िराक़-ए-यार में तस्कीन हो तो क्यूँकर हो
“I am not mad, Ghalib, yet as per the venerable word,If solace be found in separation, then how can it occur?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ालिब, मुझे पागलपन नहीं है, लेकिन पूज्यनीय वचन के अनुसार, यदि प्रियतम के वियोग में शांति मिल सकती है, तो वह कैसे संभव है?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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