ग़म-ए-दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की
फ़लक का देखना तक़रीब तेरे याद आने की
“If from worldly grief I ever found respite to raise my head,The sight of the sky became the pretext for your memory instead.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि संसार के दुखों से मुझे कभी सिर उठाने की फुरसत मिली भी, तो आसमान को देखना भी तुम्हारी याद आने का बहाना बन गया।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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